Thursday, October 14, 2010

छोड़ो भी, अब जाने दो.....!

by Armaan Khan on Sunday, October 10, 2010 at 11:22am



अब तुमसे,
क्या दिल का हाल कहें,
छोड़ो भी, अब जाने दो....
अपने दर्द तुम्हे दिखाएँ क्या,
तुम्हारी उलझनें और बढ़ाएँ क्या,
हमे तन्हा ही यूँ,
गमों का बोझ उठाने दो,
छोड़ो भी, अब जाने दो.....
वैसे भी, मेरी दास्तां,
एक सदी की है,
लेकिन तुम्हे फ़ुर्सत,
बस दो घड़ी की है,
अब मेरे फसाने को,
खामोशियाँ ही सजाने दो,
छोड़ो भी, अब जाने दो.....
हाथ मिलाओ, इजाज़त दो,
कि सफ़र बहुत लंबा है,
और हौसला है कि घटता जाता है,
मैं समझता तो हूँ
कि ये सफ़र तेरे बगैर,
बहुत बोझिल, बहुत भारी है,
लेकिन मैं ये भी जानता हूँ
कि तुम मंदिरों की देवी हो,
मैं रास्ते का फकत एक पत्थर हूँ,
मुझे यूँ ही इसी तरह,
रास्तों की ठोकर खाने दो,
छोड़ो भी, अब जाने दो.....

-    ­अरमान 

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