by Armaan Khan on Monday, September 20, 2010 at 11:52am
घर से दफ़्तर,
दफ़्तर से घर जाते हुए,
क्या तुमने अपनी कार के शीशे से,
कभी आस पास गौर से देखा है....
इन्ही सड़को पर,
जो रोज़ तुमसे टकराते थे,
जिनसे तुम्हारी आँखें,
रोज़ दो चार होती थी,
इन सड़को ने उनमे से,
कुछ खुशदिल चेहरे,
कुछ चमकती हुई आँखें,
कुछ हंसते हुए आदमी,
चुपचाप कम कर दिए....
और तुम..
अपनी कार के म्यूज़िक प्लेयर से,
नयी फिल्म के गाने सुनने मे,
इतना मसरूफ़ थे,
कि तुम्हे पता भी नही चला !
- अरमान
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