By Armaan Khan · Tuesday, September 28, 2010
शायद खत्म ये फ़ासले हो जायेंगे,
जब हमारे बीच फ़ैसले हो जायेंगे !
अयोध्या भी सुकून से हो जायेगी,
हम तुम भी अच्छे भले हो जायेंगे !
अब बदगुमानियाँ भी मिट जाएँगी,
दूर, सब शिकवे गिले हो जायेंगे !
हाथों से नही, दिल से मिलेंगे तो,
दिल से दिल के मरहले हो जायेंगे !
नफ़रत ढूँढने से भी ना मिलेगी,
मोहब्बत के सिलसिले हो जायेंगे !
- अरमान
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