Thursday, October 14, 2010

ना मंदिर चाहिए, ना मस्जिद चाहिए, हमे बस हिंदोस्ताँ चाहिए !

By Armaan Khan · Tuesday, September 28, 2010



शायद खत्म ये फ़ासले हो जायेंगे,
जब  हमारे बीच  फ़ैसले हो जायेंगे !

अयोध्या भी सुकून से हो जायेगी,
हम तुम भी अच्छे भले हो जायेंगे !

अब बदगुमानियाँ भी मिट जाएँगी,
दूर, सब शिकवे गिले हो जायेंगे !

हाथों से नही, दिल से मिलेंगे तो,
दिल से दिल के मरहले हो जायेंगे !

नफ़रत ढूँढने से भी ना मिलेगी,
मोहब्बत के सिलसिले हो जायेंगे !

- अरमान

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